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पूनम यादव का त्याग और सूरज यादव की मेहनत: संघर्ष से सफलता तक की कहानी

सूरज यादव और पूनम यादव की प्रेरणादायक कहानी: एक पत्नी का त्याग जिसने पति को डिप्टी कलेक्टर बनाया

हम अक्सर सुनते हैं कि “हर सफल पुरुष के पीछे एक स्त्री का हाथ होता है।” यह कहावत सूरज यादव और उनकी पत्नी पूनम यादव पर पूरी तरह फिट बैठती है। यह कहानी सिर्फ मेहनत की नहीं, बल्कि भरोसे और त्याग की भी है।

शादी के बाद बढ़ी मुश्किलें

सूरज यादव की शादी पूनम यादव से हुई। उस समय सूरज कॉल सेंटर में नौकरी कर रहे थे और ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी साथ में कर रहे थे। शादी के बाद जिम्मेदारियाँ बढ़ीं और हालात इतने कठिन हो गए कि घर चलाना मुश्किल हो गया।
सूरज ने पत्नी से पूछा –
“क्या मैं नौकरी करूं या JPSC की तैयारी जारी रखूं?”
इस पर पूनम ने कहा –
“आप पूरी लगन से पढ़ाई कीजिए, घर मैं संभाल लूंगी

संघर्ष का दौर
शुरुआत में पूनम ने मायके से मदद ली, लेकिन बाद में वह सहारा भी बंद हो गया। घर में बच्चा भी हो गया और जिम्मेदारियाँ दोगुनी हो गईं।
2022 में जब सूरज यादव JPSC परीक्षा में सिर्फ 7 नंबर से चूक गए, तो उनका हौसला टूट गया। हार मानने ही वाले थे कि पूनम ने फिर उन्हें संभाला –
“आप चिंता मत कीजिए, पढ़ाई पर ध्यान दीजिए। मैं हूं न, सब देख लूंगी।”
दिन-रात की मेहनत
सूरज ने दिन में डिलीवरी बॉय और रिपेड़ो की नौकरी की और रात को पढ़ाई करते रहे। उधर पूनम ने घर और बच्चे की सारी जिम्मेदारी अकेले उठाई ताकि सूरज सिर्फ अपने सपने पर ध्यान दे सकें

सफलता का दिन
आखिरकार मेहनत रंग लाई। JPSC परीक्षा में सूरज यादव ने 110वीं रैंक हासिल
की और अब वे डिप्टी कलेक्टर बन गए।

असली नायिका – पूनम यादव

सूरज की यह सफलता जितनी उनकी मेहनत की है, उतनी ही पूनम यादव के त्याग और सहयोग की भी है। अगर पूनम उस समय उनका साथ न देतीं, तो शायद यह सपना पूरा नहीं हो पाता।

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